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जनजातीय कला-संस्कृति के संरक्षण और कलाकारों के सम्मान महोत्सव का आयोजन

जनजातीय कला-संस्कृति के संरक्षण और कलाकारों के सम्मान हेतु ‘बस्तर पंडुम 2026’ का आयोजन

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के निर्देशन में जनजातीय बहुल बस्तर संभाग की समृद्ध लोककला, संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण, संवर्धन एवं सतत विकास के उद्देश्य से ‘बस्तर पंडुम 2026’ का भव्य आयोजन किया जा रहा है। यह महोत्सव बस्तर की विशिष्ट जनजातीय पहचान को सहेजने के साथ-साथ स्थानीय कलाकारों को मंच और सम्मान प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

 

तीन चरणों में होगा आयोजन

बस्तर पंडुम 2026 का आयोजन तीन चरणों में किया जाएगा।
प्रथम चरण में जनपद स्तरीय प्रतियोगिता, द्वितीय चरण में जिला स्तरीय प्रतियोगिता तथा तृतीय चरण में संभाग स्तरीय प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी।

कलेक्टर श्री अमित कुमार के निर्देशन एवं जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री मुकुन्द ठाकुर के मार्गदर्शन में प्रथम चरण के अंतर्गत जनपद स्तरीय प्रतियोगिता का आयोजन 16 जनवरी 2026 को किया जाएगा।
जिले के जनपद पंचायत सुकमा एवं कोंटा विकासखंड में यह प्रतियोगिताएं एक ही दिन संपन्न होंगी।

कलाकारों को निःशुल्क आवेदन का अवसर

इस प्रतियोगिता में ग्राम पंचायत स्तर से 12 विधाओं से संबंधित सभी कलाकारों एवं कला समूहों को जनपद स्तरीय प्रतियोगिता में सम्मिलित होने हेतु निःशुल्क ऑफलाइन आवेदन के माध्यम से आमंत्रित किया गया है।
प्रत्येक विधा से एक-एक दल अथवा समूह प्रतिभाग करेगा।

आवेदन हेतु इच्छुक कलाकार अपने ग्राम पंचायत सचिव अथवा जनपद पंचायत मुख्यालय से संपर्क कर सकते हैं।

प्रोत्साहन राशि का आकर्षक प्रावधान

जनपद स्तरीय प्रतियोगिता में प्रत्येक विधा के विजेता दल को 10 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी।
द्वितीय चरण की जिला स्तरीय प्रतियोगिता में प्रत्येक विधा से चयनित एक-एक दल को भाग लेने का अवसर मिलेगा, जहां विजेता दल को 20 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।

तृतीय चरण में आयोजित संभाग स्तरीय प्रतियोगिता में बस्तर संभाग के 7 जिलों की 12 विधाओं के कुल 84 प्रतिभागी दल (जिला स्तरीय विजेता) भाग लेंगे।
संभाग स्तर पर—

  • प्रथम पुरस्कार: 50 हजार रुपये

  • द्वितीय पुरस्कार: 30 हजार रुपये

  • तृतीय पुरस्कार: 20 हजार रुपये

  • शेष प्रतिभागी दलों को 10 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी।

12 विधाओं में दिखेगी बस्तर की जीवंत संस्कृति

बस्तर पंडुम 2026 में बस्तर की जनजातीय संस्कृति की विविध और जीवंत झलक 12 प्रमुख विधाओं में देखने को मिलेगी।

जनजातीय नृत्य:
गेड़ी, गौर-माड़िया, ककसार, मांदरी, दण्डामी, एबालतोर, दोरला, पेंडुल, हुलकीपाटा, परब, घोटुलपाटा, कोलांगपाटा, डंडारी, देवकोलांग, पूसकोलांग, जीतने कोकरेंग (आखेट नृत्य) आदि।

जनजातीय गीत:
घोटुलपाटा, लिंगोपेन, चैतपरब, रिलो, लेजा, कोटनी, गोपल्ला, जगारगीत, धनकुल, मरमपाटा, हुलकीपाटा आदि।

जनजातीय नाट्य:
माओपाटा, भतरा, लोकनाट्य आदि।

जनजातीय वाद्ययंत्रों का प्रदर्शन:
धनकुल, डोल, चिटकुल, तोड़ी, अकुम, बावासी, मांदर, मृदंग, सारंगी, गुदुम, मोहरी, चिकारा सहित अन्य पारंपरिक वाद्य।

जनजातीय वेशभूषा एवं आभूषण:
पाटा-लुगा, छेद्रा, भदई जैसी पारंपरिक वेशभूषा तथा लुरकी, करधन, सुतिया, बिछिया, फुली, नांगमोरी, मुंदरी, सुर्रा जैसे पारंपरिक आभूषणों का प्रदर्शन।

जनजातीय शिल्प एवं चित्रकला:
धड़वा, माटीकला, काष्ठ, ढोकरा, लौह, प्रस्तर, गोदना, भित्तिचित्र, बांस एवं घास शिल्प तथा मुरिया पेंटिंग, गोंड पेंटिंग।

जनजातीय पेय एवं व्यंजन:
सल्फी, ताड़ी, हंडिया, पेज, मांड़, अमारी शरबत, पारंपरिक चटनियां तथा चापड़ा चटनी, आमटा, बांस की सब्जी, मुठिया, तेंदुपत्ता की सब्जी, सालेभाजी आदि।

आंचलिक साहित्य एवं वन औषधि:
लोककथाएं, लोकगीत, लोकनाट्य, मौखिक परंपराओं का प्रस्तुतीकरण तथा सर्पगंधा, गुंजा, महुआ, चिरायता, ब्राम्ही, अश्वगंधा सहित पारंपरिक वन औषधियों का प्रदर्शन।

बस्तर पंडुम 2026 न केवल जनजातीय कलाकारों को सम्मान देने का मंच बनेगा, बल्कि बस्तर की सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।