राष्ट्रीय युवा दिवस और स्वामी विवेकानंद जयंती पर बस्तर में आयोजित ‘स्वदेशी संकल्प दौड़’
“उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए।” — स्वामी विवेकानंद जी के इस प्रेरक वचन को ध्यान में रखते हुए बस्तर के जनप्रिय युवा सांसद माननीय महेश कश्यप जी ने राष्ट्रीय युवा दिवस और युगपुरुष स्वामी विवेकानंद जी की 164वीं जयंती के पावन अवसर पर जगदलपुर में आयोजित ‘स्वदेशी संकल्प दौड़’ में भाग लिया।
युवाओं में जोश और उत्साह
राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) द्वारा आयोजित इस दौड़ में बड़ी संख्या में युवा और छात्र-छात्राएं शामिल हुए। दौड़ के दौरान युवाओं में जोश और उत्साह देखते ही बन रहा था। उन्होंने केवल शारीरिक स्वास्थ्य का प्रदर्शन ही नहीं किया, बल्कि अपने हृदय में स्वदेशी अपनाने और लोकल फॉर वोकल के संकल्प को भी मजबूत किया।

स्वदेशी और आत्मनिर्भर भारत का संदेश
इस दौड़ का उद्देश्य केवल शारीरिक स्वास्थ्य तक सीमित नहीं था। आयोजकों ने इसे ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘स्वदेशी’ को अपनाने का एक माध्यम बताया। सांसद महेश कश्यप ने कहा कि स्वामी विवेकानंद के विचार आज भी युवाओं के लिए राष्ट्र निर्माण और सामाजिक सुधार की प्रेरणा का सबसे बड़ा स्रोत हैं। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे अपने जीवन में सकारात्मकता, अनुशासन और राष्ट्रप्रेम को अपनाएँ और अपने लक्ष्य प्राप्ति के लिए लगातार प्रयास करते रहें।
स्वयंसेवकों और आयोजकों की सराहना
सांसद महेश कश्यप ने NSS के सभी स्वयंसेवकों और सहभागी युवाओं की सराहना की और उन्हें इस सफल आयोजन के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि युवा शक्ति ही राष्ट्र का सबसे बड़ा पूंजी है और ऐसे आयोजन युवाओं में सामाजिक जिम्मेदारी और राष्ट्रीय चेतना का संचार करते हैं।
स्वामी विवेकानंद की शिक्षा और युवा शक्ति
उन्होंने आगे कहा कि स्वामी विवेकानंद का संदेश केवल प्रेरक विचार नहीं, बल्कि व्यावहारिक जीवन में कार्यान्वयन का मार्गदर्शन है। युवा शक्ति का सदुपयोग केवल व्यक्तिगत सफलता तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि इसे राष्ट्र और समाज के निर्माण में लगाना चाहिए।
समापन संदेश
इस अवसर पर आयोजित ‘स्वदेशी संकल्प दौड़’ ने यह संदेश दिया कि युवा न केवल शारीरिक रूप से स्वस्थ हों, बल्कि मानसिक, सामाजिक और राष्ट्रीय रूप से जागरूक भी हों। सांसद महेश कश्यप ने सभी से अपील की कि वे स्वामी विवेकानंद के सपनों का ‘प्रबुद्ध और समर्थ भारत’ बनाने का संकल्प लें और अपनी शक्ति का उपयोग समाज और राष्ट्र के कल्याण के लिए करें।
इस दौड़ ने युवाओं को केवल स्वास्थ्य और खेल के प्रति जागरूक ही नहीं किया, बल्कि स्वदेशी अपनाने, लोकल प्रोडक्ट्स को बढ़ावा देने और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के लिए प्रेरित किया। आयोजकों और सहभागी युवाओं की सक्रियता ने कार्यक्रम को सफल और यादगार बना दिया।












