कोंटा। एर्राबोर स्थित पीएम श्री पोटाकेबिन कन्या आश्रम में अध्ययनरत छात्रा की मौत के मामले को लेकर बस्तरिया राज मोर्चा ने बुधवार को कोंटा विश्राम गृह में प्रेस वार्ता की। मोर्चा ने मामले में कई सवाल उठाते हुए प्रशासन से निष्पक्ष एवं विस्तृत जांच की मांग की है।
मोर्चा के पदाधिकारियों ने बताया कि उनकी टीम ने छात्रा के गृह ग्राम मेट्टागुड़ा पहुंचकर परिजनों से मुलाकात की और छात्रा की तबीयत खराब होने से लेकर उसे घर लाए जाने तथा बाद में हुई मौत तक की जानकारी ली।
मोर्चा के अनुसार, परिजनों ने बताया कि आश्रम प्रबंधन की ओर से 25 तारीख से छात्रा को घर ले जाने के लिए लगातार फोन किया जा रहा था। उस समय क्षेत्र में बाढ़ की स्थिति होने के कारण परिजन तत्काल आश्रम नहीं पहुंच सके। पानी कम होने के बाद छात्रा का भाई उसे लेने आश्रम पहुंचा। परिजनों के मुताबिक, उस समय छात्रा की हालत गंभीर थी। परिवार के अनुसार, 27 तारीख को छात्रा को घर लाया गया और 28 तारीख को उसकी मौत हो गई।
प्रेस वार्ता में मोर्चा ने सवाल उठाया कि यदि छात्रा की तबीयत 21 तारीख से खराब थी, तो उसे समय रहते बेहतर उपचार के लिए अस्पताल क्यों नहीं ले जाया गया। मोर्चा ने कहा कि छात्रा की गंभीर स्थिति होने पर केवल परिजनों को घर ले जाने के लिए सूचना देने के बजाय तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराए जाने की आवश्यकता थी।
मोर्चा ने यह भी बताया कि छात्रा का गांव मेट्टागुड़ा नेटवर्क सुविधा से वंचित है। ऐसे में केवल फोन के माध्यम से परिजनों को छात्रा की वास्तविक स्वास्थ्य स्थिति की जानकारी मिल पाना मुश्किल था। छात्रा की मां ने कहा कि आदिवासी परिवार अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा और सुरक्षित भविष्य की उम्मीद से घर से दूर आश्रम एवं छात्रावासों में भेजते हैं। ऐसे संस्थानों में बच्चों की शिक्षा के साथ स्वास्थ्य और सुरक्षा की जिम्मेदारी भी महत्वपूर्ण है।
बस्तरिया राज मोर्चा ने प्रशासन से मांग की है कि 21 से 28 तारीख तक छात्रा की स्वास्थ्य स्थिति, आश्रम में किए गए उपचार, स्वास्थ्यकर्मियों द्वारा किए गए परीक्षण, अस्पताल ले जाने की स्थिति, परिजनों को दी गई जानकारी और छात्रा को घर भेजने के निर्णय की जांच की जाए।
मोर्चा ने कहा कि जांच के बाद ही छात्रा की मौत के वास्तविक कारण और किसी संभावित लापरवाही की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। संगठन ने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाने और दोष पाए जाने पर जिम्मेदारी तय करने की मांग की है।




