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पोलावरम परियोजना को लेकर मुआवजे की मांग तेज, छत्तीसगढ़ और आंध्र प्रदेश में ग्रामीणों का प्रदर्शन

 

 

 

 

 

 

 

 

 

सुकमा/कोंटा। पोलावरम परियोजना के संभावित प्रभाव को लेकर प्रभावित होने वाले ग्रामीणों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। ग्रामीणों की ओर से उचित मुआवजा, पुनर्वास और प्रभावित क्षेत्रों का स्पष्ट सर्वे कराने की मांग को लेकर राज्यपाल और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपे जा रहे हैं।

 

इसी क्रम में आंध्र प्रदेश के चित्तूर क्षेत्र में सीपीएम से जुड़े लोगों द्वारा स्थानीय ग्रामीणों को उचित मुआवजा दिलाने की मांग को लेकर सड़क पर धरना प्रदर्शन किए जाने की जानकारी सामने आई है। प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों की समस्याओं और परियोजना से संभावित प्रभाव को लेकर आवाज उठाई गई।

 

वहीं छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के कोंटा विकासखंड में भी पोलावरम परियोजना के संभावित बैकवाटर प्रभाव को लेकर ग्रामीणों की चिंता सामने आई है। कोंटा बस स्टैंड परिसर में कांग्रेस द्वारा धरना प्रदर्शन किया गया और प्रभावित ग्रामीणों को उचित मुआवजा एवं पुनर्वास दिलाने की मांग उठाई गई। प्रदर्शन के बाद राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपा गया।

 

ज्ञापन में पोलावरम के संभावित डूब क्षेत्र का नए सिरे से सर्वे कराने, प्रभावित परिवारों के लिए उचित पुनर्वास एवं मुआवजे की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग प्रमुख रूप से रखी गई। सुकमा, बीजापुर और दंतेवाड़ा के संभावित प्रभावित क्षेत्रों को लेकर भी चिंता जताई गई है।

 

ग्रामीणों का कहना है कि परियोजना के प्रभाव को लेकर स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए और यदि किसी परिवार की जमीन, मकान या आजीविका प्रभावित होती है तो विस्थापन से पहले उचित मुआवजा और पुनर्वास सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

 

पोलावरम परियोजना को लेकर छत्तीसगढ़ में संभावित प्रभावित गांवों की संख्या और डूब क्षेत्र को लेकर अलग-अलग आंकड़ों का उल्लेख सामने आया है, जिसके कारण स्थानीय ग्रामीणों में असमंजस भी बना हुआ है।

 

अब प्रभावित ग्रामीणों की नजर सरकार की ओर है कि उनके सर्वे, पुनर्वास और मुआवजे को लेकर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।