कोंटा। दोरला जनजाति को 26 सितंबर 2022 को जनजाति का दर्जा मिलने के बाद समाज द्वारा प्रतिवर्ष स्थापना दिवस मनाया जा रहा है। आगामी 26 सितंबर 2026 को होने वाले स्थापना दिवस की तैयारियों को लेकर शनिवार को गोलापल्ली रोड स्थित ढोंडरा क्रिकेट मैदान में सामाजिक बैठक आयोजित की गई।
बैठक में स्थापना दिवस आयोजन की रूपरेखा, वित्तीय व्यवस्था, सामाजिक एजेंडे और ग्राम-जोन स्तर की जिम्मेदारियों को लेकर चर्चा की गई। इस दौरान पोलावरम परियोजना के बैकवाटर से संभावित रूप से प्रभावित 18 गांवों की समस्याओं को सामने रखने के लिए 18 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल का गठन किया गया। सोयम भीमा को प्रतिनिधिमंडल का अध्यक्ष बनाया गया है।
प्रतिनिधिमंडल प्रभावित गांवों में जमीन, संभावित विस्थापन और समाज से जुड़े अन्य मुद्दों को सामने रखेगा।
जमीन और विस्थापन के मुद्दे पर उठे सवाल
समाज के संरक्षक कट्टम सीताराम ने कहा कि दोरला समाज पीढ़ियों से इस क्षेत्र में निवास करता आ रहा है। उन्होंने पोलावरम परियोजना को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि परियोजना से आंध्र प्रदेश को लाभ होगा, तो प्रभावित होने वाले दोरला समाज को इसका क्या लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि दूसरों की खुशी के लिए समाज अपने घर और जमीन क्यों छोड़े।
उन्होंने अंदरूनी क्षेत्रों में जमीन और पट्टे से जुड़े मामलों की जांच की मांग भी उठाई। उनका कहना था कि पीढ़ियों से निवास कर रहे कई ग्रामीणों को सीमित भूमि के पट्टे मिले हैं, जबकि कुछ लोगों के नाम अंदरूनी क्षेत्रों में कई हेक्टेयर जमीन के पट्टे होने की बात सामने आती है।
घटती आबादी पर जताई चिंता
कट्टम सीताराम ने दोरला जनजाति की घटती आबादी को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने बैठक में जनसंख्या से संबंधित आंकड़ों का उल्लेख करते हुए कहा कि लगातार घटती आबादी समाज के अस्तित्व के लिए चिंता का विषय है।
उन्होंने कहा कि पहले से घटती आबादी के बीच यदि पोलावरम बांध में पानी का भंडारण होने के बाद कोंटा क्षेत्र के 18 गांव प्रभावित होते हैं, तो इसका असर दोरला समाज के सामाजिक और सांस्कृतिक अस्तित्व पर पड़ सकता है।
बैठक में दोरला समाज के जिला अध्यक्ष सोयम नागेश, सोयम भीमा, ब्लॉक अध्यक्ष आस मुकेश, ब्लॉक उपाध्यक्ष मड़कम मुदराज, राजेश्वर बोग्गो, सरियम मुकेश, सेमल नरेश सहित विभिन्न जोन के प्रभारी, पटेल-पुजारी और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।





