बस्तरिया राज मोर्चा युवा मोर्चा के ब्लॉक उपाध्यक्ष इरफान खान ने कोंटा में कांग्रेस द्वार आयोजित आमसभा पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि पट्टा देने के नाम पर गांव-गांव से आदिवासी ग्रामीणों को बुलाकर भीड़ जुटाई गई और उन्हें गुमराह करने का काम किया गया।
इरफान खान ने कहा कि अगर कांग्रेस को आदिवासियों की जमीन और पट्टे की इतनी ही चिंता थी, तो जब उनकी सरकार थी तब इन मुद्दों पर ठोस कार्रवाई क्यों नहीं की गई? आज भी कोंटा ब्लॉक के अंदरूनी इलाकों में बड़ी संख्या में आदिवासी 5-10 एकड़ और उससे अधिक जमीन पर पीढ़ियों से खेती कर रहे हैं, लेकिन उनके पास जमीन का अधिकार-पत्र नहीं है।
उन्होंने कहा कि 2022 में जब कोंटा में बड़ी बाढ़ आई थी, उस समय भी छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार थी। बाढ़ से कोंटा ब्लॉक में हजारों लोग प्रभावित हुए थे और मुआवजे को लेकर ग्रामीणों ने प्रदर्शन भी किया था। उस समय कई प्रभावित परिवारों को लंबे समय तक मुआवजे का इंतजार करना पड़ा और कुछ लोगों को बेहद कम राशि मिलने की शिकायतें सामने आई थीं।
इरफान खान ने कहा कि उसी समय पोलावरम के संभावित डूबान और उससे होने वाले नुकसान को लेकर भी ग्रामीण लगातार अपनी आवाज उठाते रहे, लेकिन उनकी समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं हुआ। पोलावरम को लेकर 2023 में भी कोंटा क्षेत्र में प्रभावित परिवारों के मुद्दे पर आंदोलन हुआ था।
उन्होंने कहा कि आज भाजपा की सरकार है और कांग्रेस विपक्ष में है, इसलिए पोलावरम और आदिवासी हितों के नाम पर राजनीति की जा रही है। जनता अब यह सवाल पूछ रही है कि जब सत्ता में रहने का मौका था, तब इन समस्याओं पर ठोस काम क्यों नहीं हुआ?
कोंटा में नगर पंचायत चुनाव नजदीक आते ही पट्टे और पोलावरम जैसे गंभीर मुद्दों को लेकर राजनीति तेज हो गई है। लेकिन आदिवासी समाज अब केवल भाषण नहीं, जमीन पर अधिकार, उचित सर्वे, मुआवजा और पुनर्वास चाहता है।
इरफान खान ने कहा कि बस्तरिया राज मोर्चा का सवाल साफ है—आदिवासियों को चुनाव के समय सिर्फ भीड़ समझना बंद किया जाए। जिन लोगों की जमीन और जीवन प्रभावित होने वाला है, उनका पहले सर्वे हो, जमीन का अधिकार स्पष्ट हो और पोलावरम प्रभावित परिवारों को उचित मुआवजा एवं सम्मानजनक पुनर्वास दिया जाए।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस हो या भाजपा, किसी भी दल के दावों को जनता अब उनके काम के आधार पर परखेगी।



