कलेक्टर ने समीक्षा बैठक में दिए आवश्यक निर्देश, महिला एवं बाल विकास योजनाओं को मिशन मोड में लागू करने पर जोर

मुख्यमंत्री की मंशा के अनुरूप जिले में महिला एवं बाल विकास विभाग की योजनाओं को धरातल पर प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह से सक्रिय नजर आ रहा है। इसी क्रम में मंगलवार को कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में महिला एवं बाल विकास विभाग की एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता कलेक्टर श्री अमित कुमार ने की।
बैठक में कलेक्टर ने विभागीय अधिकारियों को स्पष्ट शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि “जनहित से जुड़ी योजनाओं में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।” उन्होंने निर्देश दिए कि जिले के हर पात्र हितग्राही तक योजनाओं का लाभ समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से पहुंचे। कलेक्टर ने कुपोषण की समस्या को जड़ से समाप्त करने के लिए सभी अधिकारियों को ‘मिशन मोड’ में कार्य करने के निर्देश दिए।
कुपोषण के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति
बैठक में बच्चों के स्वास्थ्य एवं पोषण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए कलेक्टर ने कई अहम निर्देश जारी किए। उन्होंने कहा कि—
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100 प्रतिशत टेक होम राशन वितरण सुनिश्चित किया जाए, ताकि सभी पंजीकृत हितग्राहियों को समय पर और पूर्ण मात्रा में पोषण आहार मिल सके।
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डिजिटल मॉनिटरिंग को मजबूत करने के लिए पोषण ट्रेकर ऐप में प्रविष्टि अनिवार्य की जाए और दर्ज किए जा रहे आंकड़ों की शुद्धता सुनिश्चित की जाए।
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गंभीर कुपोषण के मामलों में किसी भी प्रकार की देरी न हो। ऐसे बच्चों की तत्काल पहचान कर उन्हें एनआरसी (NRC) में भर्ती कराया जाए।
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एनआरसी से उपचार के पश्चात बच्चों को मिलने वाली 15 दिनों की प्रोत्साहन राशि का भुगतान शीघ्र सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए।
अंतर-विभागीय समन्वय से बढ़ेगी कार्यक्षमता
कलेक्टर श्री अमित कुमार ने कहा कि कुपोषण से लड़ाई केवल एक विभाग की जिम्मेदारी नहीं है। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है।
उन्होंने निर्देश दिए कि गर्भवती महिलाओं के ANC पंजीयन, स्वास्थ्य जांच और पोषण संबंधी जानकारी नियमित रूप से साझा की जाए, ताकि उन्हें शासन की योजनाओं का समय पर लाभ मिल सके और मातृ-शिशु मृत्यु दर में कमी लाई जा सके।

आंगनबाड़ी केंद्रों को बनाएं पोषण शिक्षा का केंद्र
कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि आंगनबाड़ी केंद्रों को केवल राशन वितरण का केंद्र न मानते हुए उन्हें पोषण जागरूकता और शिक्षा का केंद्र बनाया जाए।
इस उद्देश्य से जिले के प्रत्येक आंगनबाड़ी केंद्र में ‘सुपोषण चौपाल’ आयोजित करने के निर्देश दिए गए, जहां ग्रामीणों को पोषण संबंधी जानकारी दी जाएगी।
ग्रामीणों को संतुलित आहार के प्रति जागरूक करने के लिए ‘तिरंगा भोजन’—जिसमें अनाज, दाल, सब्जी एवं अंडा शामिल हैं—की प्रदर्शनी आयोजित की जाएगी, ताकि लोग पोषण के महत्व को समझ सकें और अपने दैनिक आहार में इसे अपनाएं।
कार्यकर्ताओं की दक्षता बढ़ाने हेतु आवासीय प्रशिक्षण
जमीनी स्तर पर योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए कलेक्टर ने कार्यकर्ताओं की दक्षता बढ़ाने पर विशेष जोर दिया।
इसके लिए तीन दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिसमें आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं को पोषण, स्वास्थ्य, डिजिटल रिपोर्टिंग एवं व्यवहार परिवर्तन संचार (BCC) से संबंधित प्रशिक्षण दिया जाएगा।
प्रशिक्षण की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए इसकी लिखित एवं मौखिक परीक्षा के माध्यम से मूल्यांकन किया जाएगा, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि प्रशिक्षण का लाभ वास्तव में जमीनी स्तर तक पहुंचे।
स्पष्ट संदेश
बैठक के अंत में कलेक्टर श्री अमित कुमार ने दो टूक शब्दों में कहा कि
“हमारा लक्ष्य केवल आंकड़े जुटाना नहीं, बल्कि सुकमा के हर बच्चे और हर माता को स्वस्थ बनाना है।”
उन्होंने निर्देश दिए कि सभी आंगनबाड़ी केंद्र नियमित रूप से संचालित हों और शासकीय योजनाओं का लाभ पारदर्शिता के साथ आम जनता तक पहुंचे।
यह बैठक जिले में कुपोषण उन्मूलन और महिला-बाल कल्याण योजनाओं को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।







