सुकमा जिले में आज सर्व आदिवासी समाज द्वारा अपनी विभिन्न मांगों को लेकर जिला कलेक्टर को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा गया। इस दौरान बड़ी संख्या में आदिवासी समाज के पदाधिकारी, सामाजिक कार्यकर्ता एवं स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे। समाज के प्रतिनिधियों ने शासन-प्रशासन से जुड़ी कई गंभीर समस्याओं को उठाते हुए जल्द समाधान की मांग की।
ज्ञापन में प्रमुख रूप से “नक्सलवाद मुक्त बस्तर” की घोषणा के संदर्भ में कई महत्वपूर्ण बिंदुओं को शामिल किया गया। समाज के पदाधिकारियों ने मांग की कि जेलों में बंद विचाराधीन एवं दोषसिद्ध आदिवासियों के मामलों की निष्पक्ष **विधिक समीक्षा** कर उन्हें ससम्मान रिहा करने हेतु स्पष्ट नीति बनाई जाए। उनका कहना है कि कई आदिवासी वर्षों से न्याय की प्रतीक्षा कर रहे हैं और उन्हें न्याय मिलना अत्यंत आवश्यक है।
इसके अलावा, सलवा जुडूम के दौरान आंध्र प्रदेश एवं तेलंगाना में विस्थापित हुए दक्षिण बस्तर के मूल निवासियों की **ससम्मान घर वापसी और पुनर्वास** की मांग भी प्रमुख रूप से उठाई गई। समाज का कहना है कि इन लोगों को उनके मूल स्थान पर बसाने के लिए ठोस योजना बनाई जानी चाहिए।
ज्ञापन में स्वास्थ्य विभाग से जुड़ी समस्याओं का भी जिक्र किया गया। डीएमएफटी (DMFT) के तहत कार्यरत संविदा कर्मियों के शोषण को समाप्त करने तथा संविदा भर्ती व्यवस्था को पूरी तरह खत्म कर नियमित भर्ती करने की मांग की गई। समाज के लोगों का कहना है कि संविदा कर्मियों को लंबे समय से असुरक्षा और शोषण का सामना करना पड़ रहा है।
इसके साथ ही आदिवासी विकासखंडों में मुख्य कार्यपालन अधिकारियों (CEO) की नियुक्ति और उनका प्रशासनिक नियंत्रण आदिम जाति विकास विभाग के अंतर्गत ही बनाए रखने की मांग रखी गई। समाज ने यह भी मांग की कि बस्तर एवं सरगुजा संभाग में तृतीय और चतुर्थ वर्ग के पदों पर स्थानीय निवासियों की 100 प्रतिशत भर्ती की व्यवस्था को पुनः लागू किया जाए।
नक्सलवाद की समस्या को लेकर समाज ने एक और महत्वपूर्ण सुझाव दिया कि बस्तर संभाग में पिछले चार दशकों से जारी इस समस्या का गहन अध्ययन करने के लिए विशेषज्ञों की एक उच्चस्तरीय समिति गठित की जाए, ताकि इसके स्थायी समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाए जा सकें।
इस दौरान सर्व आदिवासी समाज के अध्यक्ष श्री उमेश सुण्डाम, जिला अध्यक्ष कोयाकुटमा विष्णु कवासी, कुमार समाज के जिला अध्यक्ष तुलसी राम, युवा प्रभाग के जिला सचिव वेट्टी देवा, सुनील सोढ़ी, सोमा मड़काम, हिरमा कश्यप, तुलसी नाग सहित कई पदाधिकारी उपस्थित रहे।
समाज के नेताओं ने एक स्वर में कहा कि शासन और प्रशासन को आदिवासियों की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए जल्द से जल्द ठोस कदम उठाने चाहिए। उन्होंने चेतावनी भी दी कि यदि समय रहते समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो भविष्य में आंदोलन का रास्ता अपनाया जा सकता है।
अंत में कलेक्टर को सौंपे गए ज्ञापन के माध्यम से समाज ने उम्मीद जताई कि प्रशासन उनकी मांगों पर सकारात्मक पहल करेगा और आदिवासी समाज को न्याय दिलाने का कार्य करेगा।
स्थान – सुकमा (छत्तीसगढ़)
संवाददाता – उइका नरेश












