सुकमा जिले के कोंटा विकासखण्ड अंतर्गत मुरलीगुड़ा ग्राम में पिछले 7 महीनों से बिजली व्यवस्था ठप होने के कारण ग्रामीणों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। गांव में अंधेरे के बीच लोगों का दैनिक जीवन प्रभावित हो चुका है, वहीं पेयजल और सड़क जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव ग्रामीणों की मुश्किलें और बढ़ा रहा है।
ग्रामीणों के अनुसार गांव में केवल एकमात्र बोरिंग उपलब्ध है, जो दरार पड़ने के कारण क्षतिग्रस्त हो चुकी है। बोरिंग से निकलने वाला पानी लाल एवं रेतीला आता है, जिसे पीने योग्य नहीं माना जा रहा। ग्रामीणों का कहना है कि यह पानी केवल हाथ-पैर धोने के उपयोग में ही लाया जा सकता है। सुबह और शाम के समय गांव के गाय-बैल भी उसी बोरिंग पर पानी पीने पहुंच जाते हैं।
पेयजल संकट के चलते ग्रामीणों को लगभग 1 किलोमीटर दूर स्थित नाले से पानी लाकर अपने घरों में संग्रह करना पड़ रहा है। गांव की महिलाओं ने बताया कि वे शाम होने से पहले ही पीने का पानी भरकर रख लेती हैं, ताकि रात में दिक्कत न हो।
इसके अलावा गांव में सड़क सुविधा भी नहीं है। ग्रामीणों ने बताया कि बारिश के दिनों में कच्चे रास्ते की स्थिति बेहद खराब हो जाती है, जिससे बच्चों को स्कूल जाने में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। वहीं गर्भवती महिलाओं एवं मरीजों को स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचाने के लिए आपातकालीन वाहन भी गांव तक नहीं पहुंच पाते।
ग्रामीणों ने प्रशासन से गांव में बिजली बहाल करने, स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने और सड़क निर्माण कराने की मांग की है, ताकि उन्हें बुनियादी सुविधाओं का लाभ मिल सके।
स्थान – सुकमा छग
संवाददाता – उइका नरेश





